हमारे बारे में

“समर शेष है नहीं पाप का भागी केवल व्याध,
जो तटस्थ हैं समय लिखेगा उनका भी अपराध।”

रामधारी सिंह दिनकर

विश्व का सबसे बड़ा लोकतंत्र ‘भारत’, एक ऐसा देश जिसका इतिहास और सभ्यता तो सदियों पुरानी है लेकिन फिर भी यहाँ बसने वाली बड़ी संख्या में युवा आबादी के चलते इस देश को अभी भी युवाओं का देश कहा जाता है।

देश का इतिहास भी गवाह है कि जितने भी बड़े परिवर्तन यहां आए हैं उसमें प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से युवाओं की सहभागिता रही ही है। फिर वो चाहे छत्रपति शिवाजी महाराज का ‘हिन्दवी’ स्वराज का सपना हो या फिर स्वामी विवेकानंद का ‘विश्व बंधुत्व’ का सन्देश यह इस देश की मिट्टी में मिले युवाओं के दृढ संकल्प दर्शाता है।

अमर शहीद भगत सिंह हों या फिर चंद्रशेखर आजाद इन्होनें अपने यौवन की शक्ति एवं शौर्य और पराक्रम से ही अंग्रेजी हुकूमत के दांत खट्टे कर दिए थे। राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के आंदोलनों को सफल बनाने और उनके नेतृत्व में भारत को आजादी दिलाने में युवा नेताओं का महत्त्वपूर्ण योगदान रहा है, यदि आजादी से लेकर अब तक के सात दशकीय समकालीन भारत के इतिहास की बात की जाए तो इस काल में भी हुए कई आंदोलनों और परिवर्तनों का नेतृत्व युवाओं ने ही किया है। कंप्यूटर क्रांति और नई आर्थिक नीति भी युवा मस्तिष्क की ही उपज थी।

इतिहास गवाह है कि आज तक दुनिया में जितने भी क्रांतिकारी परिवर्तन हुए हैं, चाहे वह सामाजिक, राजनीतिक, आर्थिक, सांस्कृतिक और वैज्ञानिक रहे हों, उनके मुख्य आधार युवा ही रहे हैं।

“न हो कमीज़ तो पाँव से पेट ढक लेंगे,
यह लोग बहुत मुनासिब हैं इस सफ़र के लिए।”

दुष्यंत कुमार

“क्या हार में, क्या जीत में किंचित नहीं भयभीत मैं
कर्तव्य पथ पर जो मिले यह भी सही वह भी सही।”

शिवमंगल सिंह ‘सुमन’

भारत का सम्पूर्ण स्वतंत्रता संग्राम और आजादी का आन्दोलन युवा शक्ति और उसकी राजनीतिक सक्रियता का जीवंत उदाहरण है। महात्मा गाँधी का सविनय अवज्ञा का मार्ग हो या फिर नेताजी सुभाष चन्द्र बोस का सशस्त्र क्रांति का रास्ता — इनकी सफलता के पीछे युवा और उसकी नेतृत्व क्षमता व कार्य कुशलता ही है। जयप्रकाश नारायण का सम्पूर्ण क्रांति का नारा भी युवाशक्ति की वजह से ही साकार हो पाया था।

इस तथ्य को कदापि नकारा नहीं जा सकता कि वर्तमान समय में युवाओं की राजनीति में सक्रियता घटी है और एक तरह से मोहभंग भी हुआ है। यह कुछ हद तक इसलिए भी है क्योंकि वर्तमान राजनीतिक परिस्थितियां उन्हीं पुराने तौर-तरीकों पर चल रही हैं जिसमें युवाओं की सहभागिता के लिए बहुत थोड़ा स्थान है।

इन सब तथ्यों को जानने के बाद यही कहा जा सकता है कि देश के उज्जवल भविष्य व आने वाली पीढ़ी के हिस्से के भारत को समृद्धशाली बनाने के लिए युवाओं का राजनीति में योगदान और सक्रियता अति आवश्यक है। वर्तमान की परिस्थिति भी कुछ ऐसी है कि राजनीति से बाहर रहकर समाज के लिए जो भी कार्य किए जा रहे हैं वो केवल स्वार्थ सिद्धि के लिए होते हैं एवं उनसे समाज में कोई निर्णायक परिवर्तन नहीं आता है।

युवाओं की नई सोच ही राजनीति को दिशा प्रदान करेगी। यह सोच परम्परागत एवं रूढ़िवादी राजनीतिक विचारों से अलग एवं दूरदर्शी होगी। यह सोच व्यक्तिगत लाभ-हानि से इतर, समाज व देश के लिए कुछ कर गुजरने की प्रेरणा से ओतप्रोत होगी। यह सोच एक नयी राजनीतिक परिकल्पना को जन्म देगी जो समता युक्त और शोषण मुक्त समाज के निर्माण के लिए समर्पित होगी।

भारत के सांस्कृतिक, राजनीतिक और सामाजिक विकास में सदैव ही युवाओं ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। आज जब देश एक बार फिर युवाओं के उसी निष्ठापूर्वक योगदान का आह्वान कर रहा है, तो यह हमारी और आपकी जिम्मेदारी है कि हम अपनी सोच एवं कार्यों से देश को एक बेहतर दिशा दें। जब युवा पुनः राजनीति में लौटेंगे तो निश्चित ही देश विकास के मार्ग पर चल निकलेगा।

युवाओं से यही आशा है कि वे राष्ट्रहित में राजनीति में प्रवेश करेंगे और देश को विकास के पथ पर ले जाने में अपनी महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।

उद्देश्य

भारत को आज भी युवाओं का देश कहा जाता है क्योंकि देश के इतिहास से लेकर वर्तमान तक युवाओं ने अपनी प्रतिभागिता से सदा ही इस देश को अपना योगदान देकर गौरवान्वित किया है। हर क्षेत्र में युवाशक्ति ने अपनी उत्कृष्ट कार्यशैली व बौद्धिकता के स्तर से देश की प्रगति में न केवल योगदान दिया है बल्कि नेतृत्व भी किया है।

राजनीति के क्षेत्र में भी स्थिति कुछ ऐसी ही थी लेकिन पिछले कुछ दशकों से राजनीति में सक्रीय परिवारवादी ताकतें अपनी पूरी शक्ति से युवाओं को राजनीति से दूर रखने का प्रयास कर रही हैं। कुछ हद तक वह इसमें सफल भी हैं क्योंकि वर्तमान राजनीतिक परिदृश्य ने युवाओं को राजनीति से दूर कर रखा है।

हम इस देश के सभी सुधी युवाओं से विनम्रता पूर्वक यह आग्रह करना चाहते हैं कि आपके विरुद्ध यह षड्यंत्र आपके साथ-साथ देश के लिए भी दुष्परिणामों को लेकर आया है। यह स्थिति केवल आपकी राजनीति में सक्रीय भागीदारी द्वारा ही बदली जा सकती है।

वर्तमान परिस्थितयों एवं तथ्यों को ध्यान में रखते हुए Iyuva युवाओं की राजनीति में सक्रीय प्रतिभागिता के लिए दृढ संकल्पित व प्रतिबद्ध है।

आइये हम और आप मिलकर इस संकल्प को और आगे लेकर जाएं एवं दूषित हो चुकी राजनीतिक व्यवस्थाओं को अपने इसी संकल्प द्वारा पुनः सही दिशा में लाकर देश को प्रगति व खुशहाली के मार्ग पर ले जाएं।

आवश्यकता

आजादी के आंदोलन के दौरान और आजादी के बाद भी युवाओं ने सामाजिक और राजनीतिक दोनों क्षेत्रों में बढ़ चढ़कर अपना योगदान दिया। इसका परिणाम यह था कि पहली लोकसभा में 40 साल से कम उम्र के सांसदों की संख्या 26% थी जो दूसरी लोकसभा में बढ़कर 32% हो गई।

परन्तु आजादी के कुछ वर्षों बाद ही राजनीतिक विद्वेष व षड्यंत्रों के कारण युवाओं की राजनीति में सहभागिता कम होती गयी और आज उसका परिणाम यह है कि वर्तमान लोकसभा में युवाओं की हिस्सेदारी मात्र 10% तक सिमट कर रह गयी है। इसमें से भी अधिकांश सांसद किसी राजनीतिक पृष्ठभूमि से ही आते हैं जिनके लिए राजनीति जनसेवा का माध्यम नहीं अपितु स्वार्थ सिद्धि का साधन है।

एक ओर जहाँ युवाओं को राजनीति से दूर रखा गया तो वहीँ दूसरी ओर व्यवस्था को इतना जटिल बना दिया गया कि साधारण पृष्ठभूमि से आने वाले युवा के लिए चुनाव लड़ना आज के समय में बेहद खर्चीला और दुर्गम हो चुका है।

परिणामस्वरूप आज के युवा ने स्वयं को इस राजनीतिक धुरी से पृथक पाया और उसके लिए राजनीतिक प्रतिभागिता असंभव होती चली गयी।

आज के समय की यह मांग है कि वर्तमान राजनीतिक तौर तरीकों में बदलाव लाया जाए लेकिन यह बिना युवाओं की भागीदारी के संभव नहीं है। इसी दिशा में IYUVA सभी चुनावी प्रक्रिया में 40 साल से कम उम्र के युवाओं के लिए 32% सीटों की आरक्षण की दिशा में निरंतर कार्य कर रहा है, हमारा केवल मानना ही नहीं अपितु पूर्ण विश्वास भी है कि इससे युवाओं की राजनीति में हिस्सेदारी तो बढ़ेगी ही साथ ही देश की बहुत सी समस्याओं का समाधान भी हो जाएगा।