‘इन्कलाब जिंदाबाद’ नारे के साथ हंसते-हंसते दी जान
23 मार्च 1931 का वह काला दिन जब ब्रिटिश सरकार ने एक साथ तीन लोगों को फांसी दी। जिसमें एक नाम था भगत सिंह। भगत सिंह को जब फांसी हुई उस वक्त उनकी उम्र महज 23 साल की थी। उनकी चाहत थी कि ब्रिटिश हाथों में जकड़ा हुआ गुलाम भारत आजाद हो जाए। जिसके लिए उन्होंने कई कोशिशें की। भगत सिंह ने अपने एक क्रांतिकारी साथी के साथ मिलकर नई दिल्ली की सेंट्रल एसेंबली में 8 अप्रैल 1929 को बम और पर्चें फेंके। जिसके बाद भारत का हर एक नागरिक जान गया कि आखिर भगत सिंह है कौन। भगत सिंह ने …
निःशुल्क और अनिवार्य शिक्षा के अनुयायी थे मौलाना आजाद…
कवि, लेखक, पत्रकार और भारतीय स्वतंत्रता सेनानी मौलाना अबुल कलाम आज़ाद या अबुल कलाम गुलाम मुहियुद्दीन का जन्म 11 नवंबर 1988 को हुआ। वह भारत की आजादी के बाद वह एक महत्त्वपूर्ण राजनीतिक रहे। वह महात्मा गांधी के सिद्धांतों का समर्थन करते थे। उन्होंने हिंदू-मुस्लिम एकता के लिए कार्य किया, तथा वे अलग मुस्लिम राष्ट्र (पाकिस्तान) के सिद्धांत का विरोध करने वाले मुस्लिम नेताओ में से भी थे। खिलाफत आंदोलन में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही। आजादी के बाद वह भारत के उत्तर प्रदेश राज्य के रामपुर जिले से 1952 में सांसद चुने गए और वह भारत के पहले शिक्षा मंत्री …
युवाओं को स्वतंत्रता का महत्व समझाने के लिए किया था प्रेरित
पंजाब के लायलपुर शहर में जन्मे सुखदेव थापर भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के एक प्रमुख क्रांन्तिकारी थे। जिन्हें 23 मार्च 1931 को फाँसी पर लटका दिया गया था। इनकी शहादत को आज भी सम्पूर्ण भारत में सम्मान के नजरिए से देखा जाता है। सुखदेव हिंदुस्तान सोशलिस्ट रिपब्लिकन एसोसिएशन के सदस्य थे। वह पंजाब और उत्तर भारत के अन्य शहरों में क्रांतिकारी गतिविधियाँ सम्भालते थे। उनका जीवन देश और देश हित को पूरी तरह समर्पित था। उन्होंने लाहौर के नेशनल कालेज में युवाओं को भारत का गौरवशाली इतिहास बताकर उनमें देशभक्ति जगाने का काम भी किया था। लाहौर में ही सुखदेव ने …
चन्द्रशेखर आजाद ने दिखाई थी आजादी की राह
भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के महानायक और लोकप्रिय स्वतंत्रता सेनानी चन्द्रशेखर आजाद का जन्म 23 जुलाई, 1906 को मध्यप्रदेश के झाबुआ जिले के भाबरा नामक जगह पर हुआ। उनके पिता का नाम पंडित सीताराम ईमानदार, स्वाभिमानी, साहसी और वचन के पक्के थे। यही गुण चंद्रशेखर को अपने पिता से विरासत में मिले थे। क्रांतिकारी आंदोलन उग्र होने के दौरान चन्द्रशेखर आजाद ‘हिन्दुस्तान सोशलिस्ट आर्मी’ से जुड़े। रामप्रसाद बिस्मिल के नेतृत्व में आजाद ने काकोरी षड्यंत्र में सक्रिय भाग लिया और पुलिस की आंखों में धूल झोंककर फरार हो गए। 17 दिसंबर, 1928 को चंद्रशेखर आजाद, भगत सिंह और राजगुरु ने शाम के समय …
सबसे कम उम्र में देश के लिए दी थी जान…
हिंदुस्तान की आजादी के लिए ना जाने हमारे देश के कितने युवा फांसी पर चढ़ गए। उन्हीं में से एक ऐसा नाम है खुदी राम बोस, जो सबसे कम उम्र में देश के लिए फांसी पर चढ़ गया। 3 दिसंबर, 1889 को बंगाल के मिदनापोर जिले में जन्में खुदीराम बोस क्रांतिकारी स्वतंत्रता सेनानी थे। बचपन में ही उनके माता-पिता का निधन हो दया था, जिसके बाद उनकी बड़ी बहन ने उन्हें पाला-पोसा था। देशप्रेम से भरे हुए खुदीराम ने बेहद कम उम्र से सभाओं में शामिल होने लगे थे। देश को आजाद कराने के लिए पढ़ाई छोड़ने के बाद खुदीराम …
‘देश के लिए दौड़ने वाला जवान बाघी होकर हारा था जिंदगी की दौड़ में’
देश के लिए भागे तो ठीक और जब अपने लिए भागे तो मिली गोली… यह महज एक बात नहीं बल्कि देश के लाल की सच्चाई है जिनका नाम शायद कोई भुला होगा। हम बात कर रहे हैं पान सिंह की तोमर की। पान सिंह तोमर का जन्म सन् 1932 को मध्यप्रदेश के जिले के भिड़ोसा में हुआ। बचपन से ही पान सिंह देश की सेवा करना चाहते थे। और अपनी इस सोच को बरकरार रखते हुए देश के प्रति सेवा भाव लिए पान सिंह फौज में भर्ती हुए। उनकी पहली भर्ती उत्तराखंड के रूड़की शहर में सूबेदार के पद पर …
काकोरी कांड के तीन महानायकों ने आजादी के लिए दी थी जान
अधिक जानकारी के लिए देखें ये वीडियो-https://www.facebook.com/100008349070154/videos/2265559890398958/ काकोरी कांड में देश की आजादी के लिए तीन महानायक राम प्रसाद बिस्मिल, ठाकुर रोशन सिंह और अशफाक उल्ला खां ने जान दी थी। तीनों का जन्म शाहजहांपुर में ही हुआ। बिस्मिल से 1922 में रोशन सिंह की मुलाकात हुई, वह अच्छे निशानेबाज थे और बिस्मिल को बेहतर निशानेबाज की जरूरत थी इसलिए बिस्मिल ने दोनों को संगठन में शामिल कर लिया। जिसके बाद ही काकोरी कांड को अंजाम दिया गया। इसलिए आजादी के इन महानायकों को काकोरी कांड को अंजाम देने के लिए सूली पर चढ़ाया गया था। 9 अगस्त 1925 की रात …
छापेमार सैनिक तात्या टोपे ने उड़ाई थी अंग्रेजों की नींद
अधिक जानकारी के लिए देखें ये वीडियो-https://www.facebook.com/100008349070154/videos/2264872430467704/ 1857 में विदेशियों के खिलाफ वीरता का परिचय देने वाले तात्या टोपे का जन्म सन् 1814 ई. में नासिक के पास पटौदा ज़िले में येवला नामक गांव में हुआ। तात्या टोपे देशस्थ कुलकर्णी परिवार में जन्मे थे। इनके पिता पेशवा बाजीराव द्वितीय के गृह-विभाग का काम देखते थे। तात्या का वास्तविक नाम ‘रामचंद्र पांडुरंग येवलकर’ था। ‘तात्या’ मात्र उपनाम था। तात्या शब्द का प्रयोग अधिक प्यार के लिए होता था। टोपे भी उनका उपनाम ही था, जो उनके साथ ही चिपका रहा। क्योंकि उनका परिवार मूलतः नासिक के निकट पटौदा ज़िले में छोटे से …
भारतीय इतिहास में स्वर्ण अक्षरों में दर्ज नाना साहेब का नाम
अधिक जानकारी के लिए देखें ये वीडियो-https://www.facebook.com/rudra.p.singh.351/videos/10212691145945665/ नाना साहेब 1857 के भारतीय स्वतन्त्रता के प्रथम संग्राम के शिल्पकार थे। उनका मूल नाम ‘धोंडूपंत’ था। कानपुर में नाना साहेब ने स्वतंत्रता संग्राम में अंग्रेजों के विरुद्ध विद्रोहियों का नेतृत्व किया। नाना साहब ने सन् 1824 में वेणुग्राम निवासी माधवनारायण राव के घर जन्म लिया। पिता पेशवा बाजीराव द्वितीय के सगे भाई थे। पेशवा ने बालक नानाराव को अपना दत्तक पुत्र स्वीकार किया और उनकी शिक्षा दीक्षा का प्रबंध किया। 1857 में जब मेरठ में क्रांति की शुरुआत हुई तो नाना साहब ने बड़ी वीरता और दक्षता से क्रांति की सेनाओं का …
अंग्रेजों ने भी माना था राजा नाहर सिंह की वीरता का लोहा
अधिक जानकारी के लिए देखें ये वीडियो- /https://www.facebook.com/rudra.p.singh.351/videos/10212679011522312/ देश की आजादी के लिए जान देने वालो में फरीदाबाद के बल्लभगढ़ में 1823 में जन्मे राजा नाहर सिंह का नाम भी आता है। नाहर सिंह के शौर्य और वीरता से अंग्रेजी हुकूमत का हर हुकमरान थर्राता था। ब्रिटिश सैनिकों का दिल्ली में दोबारा अधिकार के लिए दबाव बढ़ने से बहादुरशाह ज़फ़र ने राजा नाहर सिंह को दिल्ली की सुरक्षा के लिए न्योता भेजा। राजा नाहर सिंह दक्षिण दिल्ली पर लोहे की दीवार बनकर ऐसे डटे कि अंग्रेज़ी हुकूमत थर्रा उठी। वहीं आगरा से आती हुई ब्रिटिश सैनिक टुकड़ियों को राजा नाहर …
